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Monday, February 7, 2011

BASED ON NEWS PAPER,JOURNALS N SUDARSAN NEWS CHANNEL

कांग्रेस और अंग्रेजों के बीच सत्ता के लिए जो सौदेबाजी हुई थी, उसमे नेताजी को 'देश निकाला' देना अंग्रेजों की मुख्य शर्त रही थी.
-नेता जी नेहरु के देहावसान के समय गुप्त वेश में उन्हें श्रद्धांजली देने आए थे.
-1965 के भारत-पकिस्तान युद्ध में जब भारत की सेनाएं हार रही थीं, तो शास्त्री जी ने नेताजी से संपर्क किया और नेताजी द्वारा अपनाए गये युद्ध कौशल और सुझाई गयी रणनीति पर चलकर भारत की हारती जा रही सेना ने अमेरिकी टेंकों के छक्के छुड़ा दिए, उस समय मोर्चे पर डटे सेना के जनरल नेताजी की गाडी के ड्राइवर बने हुए थे.
-नेता जी इंदिरा से भी मिले थे और उन्हीं के कहने पर इंदिरा ने अंग्रेजों की बनाई कांग्रेस का नाम बदलकर कांग्रेस (आई) रखा था.
-इंदिरा ने सरकारी दस्तावेजों में नेताजी के जीवित होने के संकेत देकर देश के सभी स्वतंत्रता सेनानियों में उनको सर्वोच्च स्थान दिया और उनके प्रति देश की कृतज्ञता प्रकट की.
-टीवी चैनल ने 1945 से लेकर इसके बाद के पचास वर्षों में विभिन्न अवसरों पर लिए गये नेताजी के अनेक चित्र प्रदर्शित किये.
-नेताजी के जीवित होने के अनेक सरकारी और अन्य देशों के प्रामाणिक दस्तावेज़ भी सुदर्शन न्यूज़ ने दिखाए.
-अनेक वयोवृद्ध लोगों ने प्रमाण देते हुए बताया कि नेताजी कब-कब किससे मिले.

कुरुक्षेत्र के एक प्रतिभाशाली पत्रकार श्री प्रदीप आर्य ने अपनी वर्षों की खोजबीन और शोध के आधार पर दावा किया कि अपने प्यारे नेताजी किसी बड़े गुप्त लक्ष्य को लेकर चलते रहे हैं, जो अखंड भारत के पुनर्निर्माण से जुड़ा है.

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